बीना स्टेशन पर हड़कंप! अंत्योदय एक्सप्रेस में मिले 100 से ज्यादा बच्चे, बाल मजदूरी की आशंका से मचा बवाल

सागर जिले स्थित बीना रेलवे जंक्शन पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सूचना मिली कि दरभंगा-अहमदाबाद अंत्योदय एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाया जा रहा है।

खबर मिलते ही बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, RPF और GRP की टीम मौके पर पहुंच गई।

जांच के दौरान ट्रेन में 100 से ज्यादा बच्चे यात्रा करते मिले। इनमें कई बच्चों के नाबालिग होने की बात सामने आई है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन बच्चों को बाल मजदूरी के लिए बिहार से गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भेजा जा रहा था। इस पूरी घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और बाल तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीना रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान मचा हड़कंप

बाल कल्याण समिति को पहले से इनपुट मिला था कि अंत्योदय एक्सप्रेस के जरिए बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर और भोपाल रेलवे डिवीजन को पहले ही अलर्ट कर दिया गया था। टीम सबसे पहले सागर स्टेशन पहुंची थी, लेकिन वहां ट्रेन का ठहराव बेहद कम होने की वजह से कार्रवाई नहीं हो सकी।

इसके बाद जैसे ही ट्रेन बीना रेलवे स्टेशन पहुंची, अधिकारियों ने तुरंत डिब्बों की तलाशी शुरू कर दी। जांच के दौरान कई बच्चे घबराए हुए दिखाई दिए। टीम ने यात्रियों से पूछताछ भी की। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को ट्रेन से उतारकर पूछताछ की गई।

बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने का शक

पूछताछ में सामने आया कि संदिग्ध व्यक्ति पांच बच्चों को लेकर जा रहा था, जिनमें तीन नाबालिग बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक बच्चों को रायसेन ले जाया जा रहा था, जहां उन्हें किसी कारखाने में काम पर लगाने की तैयारी थी।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कुछ बच्चों तक सीमित नहीं हो सकता। उन्हें शक है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जो गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी और अच्छी कमाई का लालच देकर दूसरे राज्यों में भेजता है।

अंत्योदय एक्सप्रेस पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

बाल कल्याण समिति के सदस्य ओमकार सिंह ने आरोप लगाया कि अंत्योदय एक्सप्रेस का इस्तेमाल पहले भी बाल मजदूरों को ले जाने के लिए किया जाता रहा है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत मिलने के बावजूद RPF और GRP की तरफ से गंभीर कार्रवाई नहीं की जाती।

उन्होंने कहा कि इस बार भी पूरी कार्रवाई जल्दबाजी में हुई और ट्रेन कम समय में रवाना हो गई। इससे कई अहम जानकारियां सामने आने से पहले ही मामला अधूरा रह गया। समिति का आरोप है कि रेलवे सुरक्षा एजेंसियां अगर पहले से सतर्क रहतीं, तो और बड़े खुलासे हो सकते थे।

RPF और GRP की भूमिका पर उठे सवाल

घटना के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का बिना जांच यात्रा करना चिंता की बात है। अगर समय रहते सूचना नहीं मिलती, तो शायद यह मामला सामने ही नहीं आता।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में बच्चों की आवाजाही पर ज्यादा निगरानी की जरूरत है। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में कई बार मानव तस्करी और बाल मजदूरी से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

बीना रेलवे स्टेशन पर सामने आए इस मामले ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है जो बच्चों को मजदूरी के लिए भेजते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार रेलवे स्टेशन मानव तस्करी रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक हैं। यहां लगातार निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई जरूरी है।

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