भोपाल में सतपुड़ा भवन में लगी भयंकर आग में कई महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें जलकर राख गई. इस आग को काबू करने में 14 घंटे लगे. सोमवार शाम को 4 बजे लगी आग में करीब 12 हजार फाइलें स्वाहा हो गई हैं. सतपुड़ा भवन में हेल्थ कमिश्नर, आदिवासी विभाग, आयुष विभाग जिन फ्लोरों में हैं, वहां सब कुछ जलकर राख हो गया. सूबे के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भले ही आग लगने की वजह की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है लेकिन कांग्रेस इस मामले में हमलावर हो गई है.
लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि सचिवालय में चुनावों से पहले आग लगने की घटना हुई हो. अक्सर ये देखा गया है कि चुनाव से पहले राज्यों के सचिवालय में आग लगती है और फिर इस पर जमकर राजनीति होती है. आइए आपको बताते हैं कि कब-कब सचिवालय में लगी आग ने सुर्खियां बंटोरी और इस पर जमकर राजनीतिक घमासान हुआ.
मध्य प्रदेश में 10 साल में 3 बार लगी आग
मध्य प्रदेश के सरकारी भवन में आग लगने की ये 10 साल में तीसरी बड़ी घटना है. नंवबर 2013 में विंध्याचल भवन में आग लगी थी. इसके दो साल बाद अक्टूबर 2015 में विंध्याचल भवन के चौथे फ्लोर पर आग लगी थी. इसमें कृषि विभाग की कई फाइलें और दस्तावेज राख हो गए थे. तब भी इन अग्निकाडों को चुनाव से जोड़कर देखा गया था. अब 8 साल बाद सतपुड़ा भवन में आग लगी है. मीडिया रिपोर्ट्स में ये खुलासा हुआ कि इस भवन में कोरोना काल के दौरान भुगतान से लेकर लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में की गई शिकायतों की फाइलें रखीं गई थी.
बिहार सचिवालय में साल 2020 में लगी आग
बिहार में 20 अक्टूबर साल 2020 से पहले हुए विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी और जेडीयू की सरकार थी. तब बिहार के पटना स्थित ग्रामीण विकास विभाग में आग लग गई थी. तब कांग्रेस ने ये आरोप लगाए थे कि नीतीश सरकार मे भ्रष्टाचार की पोल ना खुले इसके लिए ये आग लगाई है. हालांकि चुनाव बाद बीजेपी-जेडीयू गठबधंन ने फिर से सरकार बनाई थी.
हालांकि दो साल बाद ही नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन छोड़कर आरजेडी और कांग्रेस की मदद से महाठबंधन की सरकार बनाई और फिर से मुख्यमंत्री बन गए. बिहार सचिवालय में इससे पहले साल 2009 में आग लगी थी. इसके बाद सचिवालय के स्वास्थ विभाग में फरवरी 2016 और विकास भवन में सितंबर 2016 में आग लगी थी.
साल 2022 में गुजरात के पुराने सचिवालय में लगी आग
गुजरात के गांधीनगर के पुराने सचिवालय में अक्टूबर 2022 में आग लगी थी. ये आग ब्लॉक 16 की दूसरी मंजिल पर स्थित सरकारी दफ्तर में लगी थी. इस अग्निकांड में कई सरकारी फाइलें जलकर राख हो गई. तब भी कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि घोटालों पर पर्दा डालने के लिए ये आग लगाई गई है. गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ये आग लगी थी. उस समय कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए लिखा कि चुनाव से ठीक पहले आग लगना बताता है कि BJP को सत्ता जाने की भनक लग गई है. इसी घबराहट में वो 27 साल के भ्रष्टाचार की फाइलें जला रहे हैं.
महाराष्ट्र सचिवालय में साल 2012 में लगी आग
महाराष्ट्र सचिवालय, जिसे मंत्रालय भवन नाम के जाना जाता है. 21 जून 2012 को लगी आग में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, राज्य के मुख्य सचिव और दो मंत्रियों के कार्यालय चपेट में आए थे. इस अग्निकांड पर जमकर सियासत हुई. दरअसल यहां आर्दश घोटाले से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे. इसी वजह से साजिश के तहत यहां आग लगने की बात कही गई. उस समय सूबे के मुख्यमंत्री कांग्रेस के पृथ्वीराज चव्हाण थे. मंत्रालय भवन में लगी आग में तीन लोगों की मौत हुई थी.
केरल सचिवालय में साल 2020 में लगी आग
केरल में साल 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले अगस्त में केरल सचिवालय के उत्तरी ब्लॉक स्थित प्रोटोकॉल विभाग में आग लग गई थी. बीजेपी और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोना तस्करी केस में लेफ्ट सरकार ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की है. हालांकि एक साल बाद हुए चुनाव में एलडीएफ की वापसी हुई थी.

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