स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित है आयरा, उज्जैन में ऐसा दूसरा मामला।
रिपोर्ट नावेद खान
उज्जैन - सात साल की बेटी आयरा सिद्धिकी निवासी नयापुरा को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) बीमारी है। एक साल की उम्र में बीमारी का उस समय पता चला, जब बच्ची का ब्लड टेस्ट करवाया गया। इसमें उसे एसएमए बीमारी पाई गई।
इस कारण वह स्कूल नहीं जा पा रही है। ऐसे में उसे पढ़ाने के लिए माता-पिता ने उसकी घर पर ही ट्यूशन लगाई है। इलाज के लिए करीब 6 लाख 20 हजार की दवाई की आवश्यकता है लेकिन माता-पिता यह खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है। पिता पयाम अहमद का कहना है बीमारी की वजह से बच्ची स्कूल जाने की स्थिति में नहीं है। हमने उसे घर पर पढ़ाने का निर्णय लिया।
घर पर ट्यूशन लगा दी है। उज्जैन में इस तरह का यह दूसरा मामला है। इसमें बच्चों को यह बीमारी पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी में बच्चे की रीड की हड्डी में नर्व सेल्स को खराब कर देती है यानी मांसपेशियां पूरी तरह से कमजोर और सिकुड़ती जाती है।
बच्चा बगैर सहारे के बैठ या चल भी नहीं पाता है। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राठौर बताते हैं कि भारत में ओरल मेडिसिन उपलब्ध है। यह दवाई जुलाई में ही लांच हुई है। इसकी एक बोतल करीब 6 लाख रुपए में आती है। इसे बच्चे को घर पर दी जा सकती है।
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