इसराइल ने इस शांत और संपन्न इलाक़े में एक रात में ही हवाई हमले करके कम से कम 25 रिहाइशी बहुमंज़िला इमारतों को ज़मींदोज़ कर दिया.अपना घर खोने वालीं उम्म सलीम अल-साफ़िन नाम की महिला ने रोते हुए मुझे बताया कि इसराइली सेना ने उन्हें 19 अक्टूबर को रात साढ़े आठ बजे तक घर खाली करने को कहा था.
अल साफ़िन ने कहा, "इसके बाद उन्होंने रात नौ बजे से शुक्रवार सुबह सात बजे तक लगातार इस इलाक़े पर बमबारी की."
उन्होंने कहा कि उनकी इमारत में 20 अपार्टमेंट थे और सभी में परिवार रहते थे. अब उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है.
अपना घर खोने वाली उम्म मोहम्मद नाम की एक अन्य महिला ने कहा, "हम आम लोग शांति से अपने घरों में रह रहे हैं. वे क्यों हम पर बम बरसा रहे हैं? हमने क्या किया है?"
अल ज़ाहरा के इन टॉवरों पर हमले के बाद क़रीब 5000 लोग बेघर हो गए हैं. जंग छिड़ने के बाद से ग़ज़ा से पहले ही लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं.
'यह जनसंहार है'
अपना घर खोने वाले अबू रमी कहते हैं कि यह 'जनसंहार' है. उन्होंने कहा कि कुछ परिवार बाहर नहीं निकले और मलबे के नीचे दब गए हैं.
लेकिन अब मलबे में फंसे लोगों को बचाना या उनके शव निकालना भी संभव नहीं है क्योंकि बचाव दल के पास ज़रूरी उपकरण नहीं हैं.
अपने तबाह हो चुके आशियाने और मलबे में अपना सामान तलाशने आए लोगों ने बीबीसी से कहा कि उनका 'सबकुछ छिन गया है.'
उन्होंने कुछ कपड़े इकट्ठा किए, उन्हें चादर में लपेटा और अपने साथ कुछ तकिये, गद्दे और कंबल लेकर लौट गए.
जब बीबीसी की टीम इसी इलाक़े में थी, तब एक शख़्स ने बताया कि इसराइली सेना का फ़ोन आया था और लोगों को इस जगह को ख़ाली करने के लिए कहा गया है.
सेना इस जगह को तुरंत ख़ाली करवाकर बचे हुए एक और टॉवर को गिराना चाहती है.
इसलिए लोगों को अपनी तलाश रोक कर वापस जाना पड़ा.
गुरुवार को हुई बमबारी में 5000 लोगों के घर तबाह हो गए.

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