BREAKING NEWS
Latest News Loading...
मालवा न्यूज़ 24X7

इंदौर : पांच बेटे, फिर भी वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर, कोर्ट से ऐसे मिला 91 साल की मां को इंसाफ


इंदौर
: पांच बेटे होने के बावजूद 91 वर्षीय वृद्धा आश्रम में रहने को मजबूर थी। वह परिवार के साथ तो रहना चाहती थी, लेकिन उसके पांचों बेटे कमरे का ताला खोलने तक को तैयार नहीं थे।
एसडीएम कोर्ट ने वृद्धा को बेटों से भरण पोषण तो दिलवा दिया था लेकिन अपने घर में रहने का वृद्धा का सपना अब भी अधूरा था। आखिर उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी बहस सुनने के बाद हाई कोर्ट ने एक माह के भीतर मकान में गैरेज के ऊपर बने कमरे का दरवाजा खोलकर कब्जा महिला को देने के आदेश दिए। कोर्ट ने पांचों बेटों से कहा है कि वे प्रतिमाह भरण पोषण के रूप में पांच-पाच हजार रुपये मां के बैंक खाते में अनिवार्य रूप से जमा करवाएं।

मामला पूर्वी क्षेत्र निवासी 91 वर्षीय सुदर्शना का है। उन्होंने एसडीओ के समक्ष "माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम" के तहत आवेदन देकर कर अपने मकान के गैरेज के ऊपर वाले कमरे का दरवाजा खोलने के आदेश देने और बेटों से भरण-पोषण दिलाए जाने की प्रार्थना की थी। एसडीओ ने इस आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकारते हुए पांचों बेटों को आदेश दिया कि वे पांच-पांच हजार रुपये भरण पोषण के रूप में अपनी मां को दें, लेकिन मकान के गैरेज के ऊपर के कमरे को लेकर कोई आदेश नहीं दिया गया। इस आदेश से व्यथित होकर वृद्धा ने कलेक्टर के समक्ष अपील भी की, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। 16 अगस्त 2022 को इस अपील को खारिज कर दिया गया।

मौत के पहले पति बना गए थे वसीयत

इस पर वृद्धा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर की। याचिका में वृद्धा ने कहा कि उनकी उम्र लगभग 91 वर्ष है। उनके दिवंगत पति ने संपत्ति बेटे के साथ खरीदी थी। पति ने इस उम्मीद के साथ कि पांचों बेटे अपनी मां की देखभाल करेंगे, एक वसीयत निष्पादित की थी, लेकिन पति की मौत के बाद बेटों के दुर्व्यवहार से दुखी होकर उन्हें आश्रम जाना पड़ा। अब अपना शेष जीवन वे अपने घर में रहकर गुजारना चाहती है लेकिन बेटे उन्हें घर में नहीं रहने दे रहे।

कोर्ट आदेश के बाद वृद्धा को मिली खुशी

हाई कोर्ट ने लंबी बहस सुनने के बाद याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को ऐसा करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि एसडीओ यह सुनिश्चित करें कि गैरेज के ऊपर वाले कमरे का कब्जा एक माह के भीतर वृद्धा को मिल जाए। यह भी ध्यान रखें कि उक्त कमरे का दरवाजा भीतर से खुला रहे। एसडीओ यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक बेटा पांच-पांच हजार रुपये की भरण पोषण की राशि एरियर्स के साथ नियमित रूप से वृद्धा के खाते में जमा करा दे।

Post a Comment

Previous Post Next Post