इलाज बाइक चालक करवा रहा था -
वहीं स्वजन ने बताया कि हादसे के बाद घटनास्थल पर पुलिस पहुंची। इसके बाद बाइक चालक भी आया और उसने इलाज करवाने की बात भी कहीं, इसलिए हम लोगों ने थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी। लेकिन बच्ची की मौत के बाद हमने अस्पताल से थाने में सूचना दी, फिर इसके बाद पुलिस आई। शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और आरोपी बाइक चालक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया।
अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप -
बता दें कि बच्ची के स्वजन ने चोईथराम अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। स्वजन ने बताया कि हादसे के बाद बच्ची स्वस्थ होने लगी थी और हमसे बात भी कर रही थी। डॉक्टरों ने बच्ची को जिस रुम में भर्ती किया था, उस रूम की पल्स मशीन खराब थी। हमने कई बार अस्पताल के स्टाफ से कहा लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। मशीन के बार-बार बंद होने के कारण पल्स का पता नहीं चल पा रहा था।
आरोपी के खिलाफ पुलिस ने नहीं की थी कोई कार्रवाई -
मासूम लक्षिता को आरोपी बाइक चालक करीब 60 फीट तक घसीटते हुए ले गया। लेकिन पुलिस ने इसके बावजूद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि इस हादसे की संपूर्ण जानकारी पुलिस को थी। वहीं स्वजन को पुलिस ने रिपोर्ट लिखवाने के लिए भी तैयार नहीं किया। पुलिस इतने बड़ा हादसा होने के बाद भी मूकदर्शक बनकर खड़ी रही। थाना प्रभारी अजय मिश्रा के मुताबिक फरियादी की शिकायत आने के बाद हमने आरोपी बाइक चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
मशीन चालू थी -
डॉ. अमित भट्ट प्रशासनिक अधिकारी (चोईथराम अस्पताल) ने बताया कि दुर्घटना में घायल बच्ची के अस्पताल पहुंचते ही पुलिस को सूचना दे दी गई थी। मॉनीटर बंद होने का आरोप भी सरासर गलत है। मानीटर चालू है उसमें बच्ची के उपचार के दौरान किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। उन्होंने कहा कि बच्ची की गंभीर हालत के बारे में बच्ची के स्वजन को भी जानकारी दे दी गई थी।
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