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शाजापुर - कलेक्टर के निर्देश की धज्जियां उड़ा रहा जिला अस्पताल प्रबंधन: इलाज के लिए इंतजार करते रहे मरीज, डॉक्टर नदारद

             डाॅक्टर के कक्ष बाहर इंतजार करते मरीज।

शाजापुर - जिला अस्पताल में बुधवार को दिनभर मरीजों की भीड़ रही। सबसे ज्यादा सर्दी, जुखाम, खांसी, बुखार व दर्द आदि से ग्रस्त मरीज इलाज करवाने आए। ओपीडी में पर्चा बनवाने के लिए सुबह 9 बजे से कतार लगना शुरू हो गई। सुबह करीब 10.30 से 12.30 बजे तक कुछ डॉक्टर अपनी सीट से नदारद रहे। मरीज इलाज के लिए इंतजार करते रहे। भास्कर संवाददाता ने डॉक्टरों के कक्षों में जाकर देखा तो कुछ कक्षों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। करीब एक घंटे डॉक्टर का इंतजार किया, लेकिन कोई नहीं आया।

मरीज व उनके परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया सहायता केंद्र व ओपीडी पर्चा काउंटर पर बैठे कर्मचारियों ने कक्ष क्रमांक-24 व 15 में दिखाने को बाेला है। बहुत देर से कक्ष के बाहर खड़े हैं, यहां कोई भी डॉक्टर नहीं आया। इसी प्रकार की स्थिति अस्पताल के तीन-चार कक्षों की और रही, जहां डॉक्टर उपस्थित नहीं थे। मरीज काफी देर तक इंतजार करते रहे।

इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. बीएस मैना से बात की तो उन्होंने बताया कक्ष क्रमांक-24 में डॉ. आलोक सक्सेना बैठते हैं। वे कैंप में गए थे। अन्य सवालों का उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अन्य विभागीय कर्मचारी जानकारी देने से बचते रहे।

टीम के आने से पहले कायाकल्प 
जानकारी के अनुसार गुरुवार को कायाकल्प का निरीक्षण करने बाहर से टीम आ रही है। टीम के आने से पहले ही बुधवार को अस्पताल प्रबंधन कमियों को छुपाने में लगा रहा। अस्पताल के अंदर-बाहर फिनाइल आदि से सफाई की गई। लंबे समय से टूटे पड़े स्ट्रेचर व चेयर को अलग रूम में रख दिया गया। मुख्य गेट के पास महीनों से फैली गंदगी भी साफ कर दी गई। रंगाई पुताई आदि का काम दिनभर चलता रहा। बता दें कि 10 अक्टूबर को दिल्ली से टीम आई थी। टीम के अधिकारी डॉ. मेहताब सिंह व डॉ. शकुंतला ने औचक निरीक्षण कर जिला अस्पताल में फैली गंदगी, बिजली के बंद उपकरण व पानी की बर्बादी आदि के फोटो व वीडियो बनाए थे।

बेवजह चल रहे बिजली उपकरण : बुधवार को अस्पताल में कुछ डॉक्टर अपनी सीट से नदारद थे। लेकिन उनके कक्ष में पंखा-एसी आदि उपकरण दिनभर चलते रहे। ज्ञात रहे कि प्रदेश में शाजापुर जिले को ऊर्जा साक्षरता में अवार्ड मिला था। कलेक्टर दिनेश जैन ने ऊर्जा साक्षरता के कई कार्यक्रम आयोजित करवाकर स्वयं सड़कों पर उतरकर लोगों से बिजली की बचत करने के लिए अपील भी की। लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कमरों में अभी भी बिजली का दुरुपयोग हो रहा है।

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