FOOD NEWS :- उज्जैन
दीपावली पर लगाए जाने वाले दीपक की रोशनी महंगी रहने वाली है, क्योंकि त्योहारों के बीच रसोई (खाद्य) तेल में उछाल आ रहा है। व्यापार जगत के आंकड़े बताते हैं कि 7 दिन में सोयाबीन तेल के भाव प्रतिकिलो 16 रुपए तक बढ़े हैं।
जाहिर कि ऐसे में उपभोक्ताओं को अपना बजट बढ़ाना पड़ रहा है। कीमत में उछाल के पीछे व्यापारी दो प्रमुख कारण बता रहे हैं। साथ ही भरोसा जता रहे हैं कि यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं रहने वाली है। फिलहाल आमजन के घर का बजट बिगड़ा है, लेकिन जल्द ही सुधार हो सकेगा।
पिछले करीब एक सप्ताह से सोयाबीन तेल की कीमत में एक-दो रुपए प्रतिदिन उछाल आ रहा है। इससे उपभोक्ताओं का रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। इसलिए कि कीमत का ये अंतर देखते ही देखते 7 दिन में प्रतिकिलो 16 रुपए तक हो गया है।
पहला कारण... सोयाबीन उपज में देरी होनेे से प्लांट में उत्पादन में लग रहा वक्त
दूसरी वजह... कोरोना के बाद पहली बार अच्छे से त्योहार मनाने की तैयारी, मांग दोगुनी, इसलिए भी बढ़ रहे दाम रोजाना 2-3 टन तेल का टर्नओवर, फिलहाल यह दोगुना तक शहर के बाजार में तेल की आपूर्ति आसपास के जिलों व प्रांतों के प्लांटों पर तैयार होने वाले तेल के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, ब्राजील व अमेरिका आदि देशों से होती है। शहर में तेल के बड़े व प्रमुख 25-30 व्यापारी हैं। सामान्य दिनों में शहर के बाजार से 2 से 3 टन तक तेल का टर्नओवर रोज का है। ये बढ़कर अभी 4 से 6 टन तक पहुंचा हुआ है। उम्मीद है कि दीपावली पर्व आते-आते ये आंकड़ा 7 टन तक
भी पहुंच सकता है। इससे शहर का व्यापार बढ़ने लगेगा।
पांच सदस्यों के परिवार पर 96 से 160 तक का अतिरिक्त भार
चार-पांच सदस्याें के परिवार में औसतन हर महीने 6 से 10 किलो तक तेल की खपत होती है। इस हिसाब से बढ़ी हुई कीमत के मान से ऐसे परिवार को 96 से लेकर 160 रुपए तक अतिरिक्त बजट बढ़ाना पड़ रहा है। तेल के थोक व्यापारी अबीजर अत्तार वाला ने बताया कि कीमत बढ़ने के बावजूद उपभोक्ता क्वालिटी से समझौता नहीं करते हैं। उम्मीद है कि दीपावली बाद कीमत में गिरावट शुरू हाेगी। इससे परिवार के बजट में भी अंतर आ जाएगा।
एक्सपर्ट व्यू- स्थिति 15-20 दिनाें में हाे जाएगी सामान्य
सोयाबीन तेल की कीमत बढ़ने की तीन प्रमुख वजह है। पहली यह कि कोरोना काल के बाद पहली बार लोग अच्छे से त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में तेल की डिमांड लगभग दोगुना तक हो गई है। दूसरा यह कि इस बार बारिश देर तक होती रही तो सोयाबीन की फसल भी लेट हुई, सोयाबीन खेतों में ही गीला है।
प्लांट तक इसे पहुंचने में देरी हो रही है। तीसरा यह कि जितना सोयाबीन प्लांट तक पहुंच रहा है, वह आपूर्ति लायक नहीं, काफी कम है और विदेशी बाजार में भी तेजी बनी हुई। हालांकि यह स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रहेगी। मुश्किल से 15-20 दिन में ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
(जैसा रिटेल किराना व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र जैन ने बताया।)
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