इंदौर भागीरथपुरा कांडः रिपोर्ट हाई कोर्ट में पांच मार्च को पेश होना मुश्किल,आम नागरिक एक अप्रैल तक दे सकते हैं आपत्तियां, दस्तावेज या साक्ष्य

इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट में पांच मार्च को पेश होना मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले में गठित न्यायिक आयोग का कार्यकाल एक माह आगे बढ़ा दिया गया है।आम नागरिक अब एक अप्रैल 2026 तक इस मामले में अपनी आपत्तियां, दस्तावेज, अभ्यावेदन और साक्ष्य आयोग के सामने पेश कर सकते हैं।

दूषित पानी की वजह से 36 मौत हो चुकी हैं

भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 मौत हो चुकी हैं। इस मामले में हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने घटना की जांच के लिए न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है।

28 फरवरी तक प्रतिवेदन आमंत्रित किए थे

जांच आयोग ने आमजन से 28 फरवरी 2026 तक साक्ष्य, दस्तावेज, शपथ-पत्र, प्रतिवेदन आमंत्रित किए थे। सोमवार को इस आयोग का कार्यकाल एक अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया गया है। प्रत्येक अभ्यावेदन के साथ प्रासंगिक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न करनी होगी। जांच आयोग का कार्यालय स्कीम-140 आरसीएम-10 फर्स्ट फ्लोर आनंद वन इंदौर पर है।

दो माह से बनी है समस्या

भागीरथपुरा में पिछले दो माह से दूषित पेयजल की समस्या बनी हुई है। क्षेत्र के कई लोग बीमार पड़ चुके हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि अन्य मौतें भी इसी कारण हुई हैं।

प्रशासन ने पूर्व में विधानसभा में जानकारी दी थी कि लगभग 20 मौतें दूषित पानी से जुड़ी हैं। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।

विधानसभा का बजट सत्र हंगामें की भेंट चढ़ गया था

इसी मामले को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही हंगामें की भेंट चढ़ गया था। राज्यपाल के अभिभाषण में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की हुई मौत का उल्लेख ना होने पर कांग्रेस के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया था।

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