इंदौर : हाई कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद अब इंदौर-देवास बायपास की बदहाली दूर होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआइ) ने बायपास के रखरखाव का ठेका पुणे की कंपनी को 63 करोड़ रुपये दे दिया है।कंपनी अगले तीन महीने में बायपास के गड्ढे भरने, स्ट्रीट लाइट लगाने, ड्रेनेज सिस्टम सुधारने सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी। यह जानकारी एनएचआइ ने मंगलवार को हाई कोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी। अगली सुनवाई तीन महीने बाद होगी।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका संस्था मातृ फाउंडेशन ने एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर की है। याचिका में कहा है कि इंदौर-देवास बायपास बीओटी प्रोजेक्ट के तहत हैदराबाद की कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दिया गया था। शर्तों के मुताबिक, कंपनी को स्ट्रीट लाइटें, लैंड स्केपिंग, पौधारोपण, ट्रक ले बाय, ट्रैफिक ऐड पोस्ट, पेडेस्ट्रियन सुविधा, सुविधाघर, चिकित्सकीय एड पोस्ट, बस बाय और बस खड़े रहने का स्थान आदि सुविधाएं आम मुसाफिर के लिए उपलब्ध कराना थीं, लेकिन कंपनी इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पाई। बायपास पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
अगली सुनवाई में होगा विश्लेषण
स्ट्रीट लाइटों का अता-पता नहीं है। पेडेस्ट्रियन सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। हालत यह है कि सुविधाघर के अभाव में यात्री परेशान होते रहते हैं। मंगलवार को एनएचएआइ की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुरानी कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया गया है। पुणे की एक कंपनी को बायपास के रखरखाव का ठेका दिया गया है। कंपनी स्ट्रीट लाइटें, लैंडस्केपिंग, पौधारोपण, ट्रक ले बाय, बायपास के गड्ढे आदि की व्यवस्था सुधारेगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि तीन माह में बायपास के हालात सुधार लें। अगली सुनवाई पर हम बायपास के स्थिति को लेकर फिर विश्लेषण करेंगे।
-इंदौर-देवास बायपास के रखरखाव और सुधार के लिए एक स्वतंत्र कमेटी गठित की जाए। इसकी रिपोर्ट समय-समय पर कोर्ट में पेश की जाए।
-पुरानी कंपनी द्वारा 10 वर्ष तक जनता से टोल टैक्स लिया गया, लेकिन कोई सुविधा नही दी। कंपनी पर हर्जाना लगाया जाए।
-पुरानी कंपनी को ब्लेक लिस्टेड किया जाए।
-याचिका के अंतिम निराकरण तक जनता से किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाए।
-दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिह्नित कर वहां साइन बोर्ड लगाए जाएं।

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