मक्सी - मक्सी जंक्शन रेलवे स्टेशन पर तत्काल टिकट की कतार में नंबर को लेकर यात्री और टिकट बुकिंग क्लर्क के बीच विवाद का मामला सामने आया है। यात्री अर्जुन परिहार ने बुकिंग क्लर्क पवन डेहरिया पर कतार में नंबर को लेकर मनमानी करने तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
अर्जुन परिहार के मुताबिक वह तत्काल टिकट बनवाने के लिए रात करीब 3 बजे स्टेशन पहुंचकर कतार में खड़ा हुआ था। उसके साथ कई अन्य यात्री भी रात से ही लाइन में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। यात्री का आरोप है कि सुबह टिकट बुकिंग शुरू होने के समय कतार में मौजूद नहीं होने के बावजूद रेलवे कर्मचारी विनोद कोचले को पहला नंबर दे दिया गया।
यात्री के अनुसार इसके बाद सुबह करीब 7 बजे पहुंचे एक व्यक्ति को दूसरा नंबर दिया गया। उसका कहना है कि रात से कतार में खड़े होने के बावजूद उसका नंबर तीसरे स्थान पर कर दिया गया। पीछे खड़े एक अन्य यात्री का नंबर भी आगे-पीछे कर दिया गया। इसको लेकर उसने बुकिंग क्लर्क से आपत्ति जताई।
अर्जुन का आरोप है कि जब उसने रात से लाइन में खड़े होने की बात कहते हुए अपनी बारी के अनुसार टिकट देने की मांग की, तो उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। विवाद के बीच उसका तत्काल टिकट भी नहीं बन सका।
शिकायत पुस्तिका को लेकर भी उठे सवाल
यात्री ने बताया कि टिकट नहीं बन पाने के बाद उसने मामले की शिकायत दर्ज कराने के लिए स्टेशन प्रबंधक अजय कुमार वर्मा से शिकायत पुस्तिका मांगी। आरोप है कि उसे पहले इंतजार करने के लिए कहा गया और बाद में भी शिकायत पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते वह तत्काल लिखित शिकायत दर्ज नहीं करा सका।
यात्रियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने और तत्काल टिकट की कतार में नंबर देने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, कुछ यात्रियों ने रेलवे कर्मचारियों के अप-डाउन और निर्धारित मुख्यालय पर रहने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
स्टेशन प्रबंधक ने कहा—मामले को समझने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है
स्टेशन प्रबंधक अजय कुमार वर्मा ने कहा कि यदि किसी यात्री के साथ वास्तव में गाली-गलौज या अभद्र व्यवहार हुआ है तो यह गलत है और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी लेने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रतलाम मंडल के रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने कर्मचारियों के निर्धारित हेडक्वार्टर को लेकर कहा कि नियमानुसार कर्मचारी को अपने निर्धारित मुख्यालय पर रहना होता है। हालांकि मंडल में बड़ी संख्या में स्टेशन होने के कारण प्रत्येक कर्मचारी के निवास की व्यक्तिगत जानकारी रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
अब सवाल यह है कि तत्काल टिकट की कतार में नंबर किस आधार पर बदले गए और यात्री के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज और रेलवे की जांच से स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
(रिपोर्ट मनोज जोशी)

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