फेफड़ों का एक्स-रे और सीटी स्कैन सामान्य। खून की जांचों में सारे मानक ठीक। हजारों लोग डेढ़-दो महीने से बुरी तरह खांस रहे हैं। डॉक्टर ऐसे मरीजों पर एंटी एलर्जिक, एंटीबायोटिक और स्टेरायड के सारे कांबिनेशन इस्तेमाल कर चुके पर खांसी नहीं हुई है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने ऐसे 679 मरीजों की केस हिस्ट्री तैयार कर सात विशेषज्ञों के पैनल को अध्ययन का काम सौंपा है।
जनवरी से शुरू हुआ सिलसिला चेस्ट विभाग के हेड डॉ. आनंद कुमार बताते हैं- ऐसी घातक खांसी के केस जनवरी में सामने आए। लगातार कई दिन तक मरीजों पर दवाएं बेअसर रहीं तो इन्हें सामान्य मरीजों से अलग दर्ज कर केस स्टडी तैयार होने लगी। 29 जनवरी से 19 मार्च के बीच 679 मरीज रजिस्टर किए हैं। सामान्य दवाओं से लेकर एंटी एलर्जिक के साथ 04 से 16 एमजी तक स्टेरायड दिए गए।
छह साल पहले भी मिले थे ऐसे मरीज
चेस्ट विभाग के पूर्व हेड डॉ. सुधीर चौधरी ने कहा- 2017 में भी ऐसे कुछ मरीज ओपीडी में देखे थे। उन पर सारी दवाएं बेअसर थीं। दो-तीन महीने तक खांसी से परेशान इन मरीजों को लंबे इलाज के बाद लाभ मिला था। उस वक्त कई एंटीबायोटिक कांबिनेशन के साथ एंटीफंगल दवाएं देनी पड़ी थीं। हालांकि तब स्टेरायड का प्रयोग नहीं किया था।
एक्स-रे और सीटी स्कैन सामान्य
सभी 679 मरीजों के फेफड़े एक्स-रे में पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। खून की जांचों में भी खांसी की कोई वजह नहीं मिली। फिलहाल इन मरीजों की खांसी पर सारी दवाएं बेअसर हैं। विशेषज्ञ एंटीफंगल दवाओं के असर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें से दो मरीज गंभीर हालत में भर्ती हैं, बाकी 677 मरीज पांच-छह बार तक फॉलोअप इलाज के लिए आ चुके हैं। उन्हें अभी तक खांसी आ रही है।
जीएसवीएम में टीबी एंड चेस्ट विभागाध्यक्ष, डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि खांसी ग्रस्त 679 मरीजों की केस हिस्ट्री बना ली है। इनकी बीमारी किसी रहस्य जैसी है। किसी न किसी वायरस का म्यूटेशन है।
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