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"क्या शहर के कोचिंग इंस्टिट्यूट बच्चों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रहे हैं?" देखें विश्लेषण

छात्रों में बढ़ते सुसाइड के लिए कौन हैं असल जिम्मेदार..?

यह खबर हर माता-पिता के लिए है जरूरी... 

शाजापुर/मध्यप्रदेश
◆ यह प्रश्न इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि हाल ही में MP बोर्ड और सीबीएसई 10वीं,12वीं का रिजल्ट आया है जिसमें हर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट एक दूसरे से कंपटीशन करते हुए स्पष्ट नजर आ रहा है बड़े-बड़े बैनर पोस्टर लगाई जा रहे हैं जिसमें बच्चों के फोटो लगाई जा रहे हैं उनके परसेंटेज भी नीचे लिखे जा रहे हैं, लेकिन ऐसे में प्रश्न यह है कि कोचिंग क्लास जिसमें एक-एक बेच में 150 से 200 बच्चे पढ़ते हैं उनमें से 8 से 10 बच्चों के जिनको की 90 से 100% मार्क्स मिले हैं सिर्फ उनके ही फोटो लगाए जाते हैं लेकिन 150 से 200 बच्चों की बीच में से 8 से 10 बच्चों के ही फोटो लगाए जाते हैं और उनका जमकर प्रचार किया जाता है ताकि अगली बेच में इन फोटो को दिखाकर ज्यादा से ज्यादा बच्चे कोचिंग में भर्ती किया जा सके।

◆ जबकि हर एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में 500 से 1000 और उससे भी अधिक बच्चे पढ़ते हैं, इन बच्चों में किसी को 50 परसेंट किसी को 60% किसी को 80 तो किसी को 90 और किसी को 100% भी आते हैं , लेकिन प्रदर्शन सिर्फ हाईएस्ट मार्क पाने वाले बच्चों का किया जाता है , ऐसे में 1000 बच्चों में से 10 20 बच्चों के फोटो कम परसेंट वाले बच्चों के पालक देखते हैं और अपने बच्चों पर कम परसेंटेज बनने पर अधिक परसेंटेज बनने वाले बच्चों का उदाहरण देते हैं और उनसे तुलना करते हैं और इसी कारण से हर कोचिंग इंस्टिट्यूट के कम परसेंटेज वाले बच्चे डिप्रेशन में आते हैं और "आत्महत्या" जैसा कदम उठाते हैं। 

शहर में लगे बड़े-बड़े पोस्टर बैनर को देखकर पालक अपने बच्चों का एडमिशन कोचिंग इंस्टिट्यूट में कराते हैं जहां हाईएस्ट परसेंटेज वाले बच्चों का फोटो दिखाकर माइंड वाश किया जाता है और पालक कहीं ना कहीं अपने बच्चों को हाईएस्ट परसेंटेज वाले बच्चों से तुलना कर इतने ही परसेंटेज लाने के लिए दबाव बनाते हैं, और जब परसेंटेज बच्चों को अधिक नहीं आते हैं तब वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं। 

◆ MP बोर्ड और सीबीएसई 10वीं,12वीं का रिजल्ट अभी आया है और कुछ बच्चों ने कम परसेंटेज के चलते इस तरह के कदम उठाए हैं जो की मध्य प्रदेश शासन को सचेत करते हैं कि शहर में कोचिंग इंस्टिट्यूट अपने कोचिंग इंस्टिट्यूट में बच्चों की बढ़ोतरी के लिए बड़े-बड़े पोस्टर बैनर लगाकर सिर्फ हाईएस्ट परसेंटेज वाले बच्चों का फोटो लगाकर प्रचार कर रहे हैं उन पर रोक लगाई जानी चाहिए। 

◆ शहर में कोचिंग इंस्टिट्यूट में 1000 मैसे 20 बच्चे जिनके परसेंटेज ज्यादा है उनको ही हाईलाइट किया जाता है जबकि 1000 में से 900 बच्चे ऐसे हैं जिनका परसेंटेज कम है उनको हाईलाइट नहीं किया जाता है,क्यों?

शासन प्रशासन को चाहिए कि शहर में चल रहे तमाम कोचिंग इंस्टिट्यूट जिनमें 9वीं से लेकर 12वीं और JEE,NEET के लिए तैयारी कराई जाती है, उन्हें सिर्फ हाईएस्ट परसेंट वाले बच्चों के पोस्टर लगाने पर रोक लगाई जानी चाहिए। 

कोचिंग इंस्टिट्यूट एवं बच्चों के पालकों से निवेदन है कि बच्चों में आपस में कंपटीशन करने की भावना पैदा ना करें यह स्वाभाविक है कि हर बच्चा 90 और 100% मार्क्स नहीं ला सकता है ऐसे में जो बच्चा कम परसेंटेज लता है वह कहीं ना कहीं हीन भावना और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है, और बच्चे ऐसे में गलत कदम उठाते हैं और उनके आपसी रिश्तों में भी खटास पैदा होती है।

बच्चों के कम परसेंटेज आने पर भी उनकी हौसला अफजाई कर उनके आत्म बल को मजबूत करने की कोशिश करें, कहीं ऐसा ना हो कि ज्यादा परसेंटेज के लालच में आप अपने बच्चों को खो दें। यह एक समझने वाली बात है 


" SAFE FOR CHILD"


Writers - मनोज जोशी 
एडिटर इन चीफ - ईशाक खान

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