मध्यप्रदेश में आज से जिलों के अंदर सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर लगा प्रतिबंध हट गया है. 15 जून से लेकर 30 जून के बीच सरकारी कर्मचारियों की ट्रांसफर हो सकेंगे.मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए ये एक बड़ा तोहफा है. जिले के भीतर प्रभारी मंत्री की मंजूरी से तबादले हो सकेंगे. इसके अलावा जिले के बाहर या अन्य विभागों में तबादलों पर सीएम की मंजूरी लेना होगी. नई स्थानांतरण नीति के अनुसार 201 से 2000 तक के संवर्ग में 10 प्रतिशत से ज्यादा तबादले नहीं किए जाएंगे. इसके अलावा किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से ज्यादा तबादले नहीं हो सकेंगे.
नई स्थानांतरण नीति के मुताबिक जिले के प्रभारी मंत्री की इजाजत से तबादले होंगे. इसके अलावा राज्य संवर्ग में विभागाध्यक्ष और प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले सीएम की सहमति से हो सकेंगे. हालांकि अधिकारी जिस जिले में पूर्व में पदस्थ रह चुका है दोबारा उसकी पोस्टिंग वहां नहीं हो सकेगी. विभिन्न विभागों में पदस्थ द्वितीय और तृतीय श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर विभागीय मंत्री की मंजूरी से अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव जारी करेंगे. जिला संवर्ग में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ट्रांसफर प्रभारी मंत्री की मंजूरी से विभाग के जिला अधिकारी जारी करेंगे.
तबादला नीति के तहत 200 कर्मचारियों की संख्या वाले संवर्ग में सिर्फ 20% तबादले हो सकेंगे. 201 से दो हजार की संख्या होने पर 10% और 2,000 से अधिक होने पर सिर्फ 5% तबादले ही होंगे. हालांकि गंभीर बीमारी या दिव्यांगता की स्थिति में कर्मचारी तबादले का आवेदन दे सकता है. इसके साथ ही कर्मचारी की लापरवाही करने पर तबादले किए जा सकते हैं. वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का ट्रांसफर प्रशासकीय विभाग कर सकता है.
स्कूल शिक्षा विभाग में तबादले के आवेदन ऑनलाइन
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे. सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट स्कूल और मॉडल स्कूल में स्वैच्छिक तबादले नहीं हो सकेंगे. इसके अलावा स्कूल के प्राचार्य और संचालक या उससे वरिष्ठ पदों के आवेदन तो ऑनलाइन लिए जाएंगे, लेकिन उनका निराकरण ऑफलाइन किया जाएगा. नई शिक्षा नीति के मुताबिक एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण होने के बाद 3 साल तक दोबारा तबादला नहीं किया जाएगा.

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