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नीमच में जिंदा किसान को मृत बताने पर कलेक्टर से 15 दिन में जवाब मांगा


रीवा - घटित हो रही घटनाओं को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग सख्त है. मामला नीमच का बड़ा दिलचस्प है. मामले के अनुसार एक किसान को कागजों में मृत बता दिया गया. परेशान किसान कागज लेकर सरकारी दफ्तरों में खुद के जिंदा होने के सबूत दे रहा है. नीमच जिले में एक किसान लंबे समय से कागजों का पुलिंदा लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. वह भी सिर्फ यह बताने के लिए कि वह जिंदा है. असल में सरकारी रिकॉर्ड में किसान को मृत बता दिया गया है. किसान सम्मान निधि नहीं मिलने पर पड़ताल हुई तो पता चला कि किसान को कागजो में मृत घोषित किया है. मामला जिले के पिपल्या नथावात गांव का है. किसान का आरोप है कि पटवारी ने किसान को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया है.

15 दिन में मांगी रिपोर्ट : किसान का कहना है कि मई 2021 से उसे मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि भी प्राप्त नहीं हो रही है. मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर नीमच से प्रकरण की जांच कराकर पीड़ित व्यक्ति की समस्या का शीघ्र समाधान कर प्रतिवेदन 15 दिवस में मांगा है. वहीं, विदिशा जिले में छेड़छाड़ से तंग छात्रा ने आत्महत्या कर ली. कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा युवक की प्रताड़ना से इतना त्रस्त हो गई थी कि उसे आत्महत्या करने के अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आया. मामले में संज्ञान लेकर आयोग ने पुलिस अधीक्षक विदिशा से प्रकरण की जांच कराकर की कार्रवाई की रिपोर्ट तीन सप्ताह में मांगी है.

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